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    फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट

    Last updated: 12-01-2024

    Fast Track Special Courts (FTSCs)

    महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 पारित करके बलात्कार के अपराधियों के लिए मौत की सजा सहित कड़ी सजा का प्रावधान किया है। पीड़ितों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए अक्टूबर, 2019 से न्याय विभाग ने यौन अपराधों से संबंधित मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए देश भर में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफ0 टी0 एस0 सी0 ) सहित विशिष्ट पोक्सो न्यायालयों की स्थापना के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना लागू की है। ऐसी प्रत्येक अदालत में 1 न्यायिक अधिकारी और 7 सदस्य कर्मचारियों का प्रावधान किया गया है। कुल पात्र 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना में शामिल हो चुके हैं। पुदुचेरी ने इस योजना में शामिल होने के लिए विशेष अनुरोध किया और मई, 2023 में एक विशिष्ट पॉक्सो न्यायालय का संचालन आरंभ किया।

    यह योजना शुरू में 767.25 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय पर दो वित्तीय वर्षों 2019-20 और 2020-21 में एक वर्ष की अवधि के लिए थी। इसमें से 474 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी निर्भया फंड से पूरा की जानी थी । वित्त वर्ष 2019-20 में 140 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2020-21 में, 160 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किए गए थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1572.86 करोड़ रुपये के कुल बजटीय परिव्यय के साथ दो वर्ष अर्थात् मार्च, 2023 तक एफ0टी0एस0सी0 की योजना को जारी रखने को मंजूरी दी थी। इसमें 971.70 करोड़ रुपये के रूप में केंद्रीय हिस्सेदारी थी । वित्तीय वर्ष 2021-22 में 134.56 करोड़ रुपये एवं वित्तीय वर्ष 2022-23 में 200 करोड़ रुपये राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किये गए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिनांक 28.11.2023 को आयोजित अपनी बैठक में 1952.23 करोड़ रुपये के कुल बजटीय परिव्यय के साथ इस योजना को अगले तीन वर्षों के लिए अर्थात् 01.04.2023 से 31.03.2026 तक बढ़ा दिया है। इसमें 1207.24 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में निर्भया फंड से पूरा किया जाना है।

    नवंबर, 2023 तक, 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 411 विशिष्ट पोक्सो न्यायालयों सहित 758 एफ0 टी0 एस0 सी0 (फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय), कार्यरत हैं, जिनमें 2,08,000 से अधिक लंबित मामलों का निपटान किया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान कुल 200 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है, जिसमें से 31 दिसंबर 2023 तक 190.22 करोड़ रुपये राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में एफ0 टी0 एस0 सी0 के संचालन के लिए केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में जारी किए जा चुके हैं।

    योजना के मजबूत कार्यान्वयन के लिए, इस विभाग ने इन न्यायालयों के आंकड़ों की मासिक आधार पर निगरानी के लिए एक ऑनलाइन निगरानी पोर्टल तैयार किया है। साथ ही उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल और राज्य पदाधिकारियों के साथ नियमित रूप से समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं।

    gems-2018

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    एफटीएससी योजना दिशानिर्देश (1MB)
    अधिक जानकारी के लिए https://dashboard.doj.gov.in/fast-track-special-court/ पर जाएँ ।