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    विभाग के बारे में

    कार्य आवंटन (नियम), 1961 के अनुसार, न्याय विभाग, भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय का एक हिस्सा है । यह भारत सरकार के सबसे पुराने मंत्रालयों में से एक है । 31.12.2009 तक, न्याय विभाग गृह मंत्रालय का हिस्सा था और केंद्रीय गृह सचिव, न्याय विभाग के सचिव थे । बढ़ते कार्यभार को ध्यान में रखते हुए और देश में न्यायिक सुधारों पर कई नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करने के लिए, एक अलग विभाग अर्थात् न्याय विभाग को गृह मंत्रालय से अलग किया गया और भारत सरकार के सचिव के प्रभार में रखा गया और इसने 01 जनवरी, 2010 से विधि और न्याय मंत्रालय के तहत काम करना शुरू कर दिया । न्याय विभाग, जैसलमेर हाउस, 26 मानसिंह रोड नई दिल्ली में स्थित है। विभाग के संगठनात्मक ढांचे में 01 अपर सचिव, 03 संयुक्त सचिव, 07 निदेशक/उप सचिव और 08 अवर सचिव शामिल हैं । न्याय विभाग के कार्यों में भारत के मुख्य न्यायाधीश, भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति, इस्तीफा और निष्कासन और उनके सेवा मामले  शामिल हैं। इसके अलावा, विभाग न्यायपालिका के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास, संवेदनशील प्रकृति के मामलों के त्वरित विचारण और निपटान के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना (बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट), देश भर के विभिन्न न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण पर ई-कोर्ट परियोजना गरीबों को कानूनी सहायता और न्याय तक पहुंच, देश के न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को वित्तीय सहायता के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू करता है। न्याय विभाग के कार्य आवंटन (नियम), 1961 में दिए गए हैं ।

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